अमेरिकी FTC अध्यक्ष का Gmail पर पक्षपातपूर्ण फिल्टरिंग का आरोप, गूगल ने आरोपों को नकारा
FTC अध्यक्ष ने Gmail पर राजनीतिक पक्षपात का आरोप लगाया।


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क्या है पूरा मामला?
अमेरिका के फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) के अध्यक्ष एंड्रयू फर्ग्यूसन ने Gmail पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि Gmail राजनीतिक आधार पर ईमेल फिल्टर करता है। फर्ग्यूसन ने इस संबंध में गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई को एक पत्र लिखा है। यह जानकारी नियामक ने गुरुवार को जारी की।
क्या आरोप लगाए गए हैं?
FTC द्वारा जारी किए गए पत्र में फर्ग्यूसन ने कहा, "हालिया रिपोर्टों से मेरी समझ यह है कि Gmail के स्पैम फिल्टर नियमित रूप से रिपब्लिकन भेजने वालों के संदेशों को उपभोक्ताओं तक पहुंचने से रोकते हैं, लेकिन डेमोक्रेट द्वारा भेजे गए इसी तरह के संदेशों को रोकने में विफल रहते हैं।" उनका कहना है कि यह एक प्रकार की पक्षपातपूर्ण फिल्टरिंग है।
गूगल का जवाब क्या है?
गूगल के प्रवक्ता ने इन आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि Gmail के स्पैम फिल्टर सभी पर समान रूप से लागू होते हैं, चाहे उनकी राजनीतिक विचारधारा कुछ भी हो। प्रवक्ता ने दोहराया कि गूगल कंपनी पत्र की समीक्षा करेगी और इस पर "रचनात्मक रूप से" काम करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया, "Gmail के स्पैम फिल्टर विभिन्न वस्तुनिष्ठ संकेतों को देखते हैं - जैसे कि लोग किसी विशेष ईमेल को स्पैम के रूप में चिह्नित करते हैं, या यदि कोई विशेष विज्ञापन एजेंसी बड़ी संख्या में ईमेल भेज रही है जिन्हें अक्सर लोग स्पैम के रूप में चिह्नित करते हैं। यह सभी भेजने वालों पर समान रूप से लागू होता है, चाहे उनकी राजनीतिक विचारधारा कुछ भी हो।"
पहले भी लगते रहे हैं ऐसे आरोप
यह पहली बार नहीं है जब गूगल पर ऐसे आरोप लगे हैं। अतीत में भी रिपब्लिकन और रूढ़िवादी समूह बड़ी तकनीकी कंपनियों पर रूढ़िवादी विचारों के साथ भेदभाव करने और उन्हें दबाने का आरोप लगाते रहे हैं, जिसे कंपनियां हमेशा नकारती रही हैं। गूगल ने भी पहले रिपब्लिकन की ऐसी ही शिकायतों को खारिज किया है।
FTC की चेतावनी
FTC अध्यक्ष के पत्र में कंपनी को चेतावनी भी दी गई है। इसमें कहा गया है कि यदि FTC के नियमों का लगातार पालन नहीं किया जाता है, तो इससे "FTC की जांच और संभावित प्रवर्तन कार्रवाई हो सकती है।"
पुराना कानूनी विवाद
गौरतलब है कि अमेरिका के एक न्यायाधीश ने पहले रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के उस मुकदमे को खारिज कर दिया था, जिसमें गूगल पर जानबूझकर राजनीतिक दल के ईमेल संदेशों को उपयोगकर्ताओं के स्पैम फ़ोल्डरों में भेजने का आरोप लगाया गया था।