मोहन भागवत के मथुरा-काशी बयान पर सीपीआईएम का हमला

मोहन भागवत के बयान पर सीपीआईएम का हमला, ध्यान भटकाने की चाल

Published · By Tarun · Category: Politics & Government
मोहन भागवत के मथुरा-काशी बयान पर सीपीआईएम का हमला
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के मथुरा और काशी से जुड़े हालिया बयानों पर अब सियासी घमासान छिड़ गया है। सीपीआईएम (मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी) के पॉलिट ब्यूरो ने इन बयानों को लेकर आरएसएस प्रमुख पर तीखा हमला बोला है। सीपीआईएम का कहना है कि मोहन भागवत के ये बयान आगामी चुनावों से पहले बीजेपी सरकार को जनता के गुस्से से बचाने की कोशिश है।

क्या है मोहन भागवत का बयान?

आरएसएस के शताब्दी वर्ष के मौके पर नई दिल्ली में आयोजित 'व्याख्यानमाला' कार्यक्रम के तीसरे दिन, 28 अगस्त, 2025 को मोहन भागवत ने कुछ टिप्पणियां की थीं। उन्होंने कहा था कि मुसलमानों को 'भाईचारे' के लिए मथुरा और काशी में मस्जिदों को 'छोड़ देना' चाहिए। उनके इसी बयान को लेकर सीपीआईएम ने कड़ी आपत्ति जताई है।

सीपीआईएम का आरोप: बीजेपी को बचाने की कोशिश

सीपीआईएम के पॉलिट ब्यूरो ने अपने एक बयान में कहा कि मोहन भागवत मथुरा और काशी के विवादों को फिर से हवा देने की कोशिश कर रहे हैं। उनका मकसद आने वाले चुनावों से पहले बीजेपी सरकार को जनता के गुस्से से बचाना है। पार्टी का आरोप है कि आरएसएस प्रमुख जानबूझकर ऐसे विवादास्पद मुद्दे उठा रहे हैं ताकि लोगों का ध्यान सरकार की विफलताओं से भटकाया जा सके।

संविधान और कानून का उल्लंघन

सीपीआईएम ने भागवत के बयानों को भारतीय संविधान की अवहेलना और देश के मौजूदा कानूनों का उल्लंघन बताया है। पार्टी ने 'धर्मस्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991' का हवाला दिया। इस कानून के तहत 1947 से पहले मौजूद किसी भी धार्मिक स्थल की स्थिति में बदलाव करना प्रतिबंधित है। सीपीआईएम ने जोर देकर कहा कि इस कानून के अनुसार, मथुरा और काशी दोनों जगहों पर यथास्थिति बनाए रखना जरूरी है। पार्टी के मुताबिक, ऐसी मांगें सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काने, जनता का ध्यान भटकाने और समाज को धार्मिक आधार पर ध्रुवीकृत करने का काम करती हैं।

आर्थिक स्थितियों से ध्यान भटकाने की रणनीति

सीपीआईएम ने यह भी कहा कि आरएसएस और उसके सहयोगी संगठनों का यह पुराना तरीका रहा है कि जब भी आर्थिक हालात खराब होते हैं, वे सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने की कोशिश करते हैं। पार्टी के पॉलिट ब्यूरो ने कहा कि अमेरिकी टैरिफ में बढ़ोतरी, कमजोर होती अर्थव्यवस्था, किसानों और मजदूरों पर बढ़ते हमलों, और चुनावी धांधली व हेरफेर के बढ़ते सबूतों के कारण लोग बीजेपी-नीत सरकार से मोहभंग होते जा रहे हैं। जनता अब सरकार की विफलताओं को और स्पष्ट रूप से देख रही है।

लोगों से एकजुटता की अपील

सीपीआईएम ने देश के लोगों से आरएसएस की विभाजनकारी नीतियों के प्रति सतर्क रहने की अपील की है। पार्टी ने अपने बयान में कहा कि भारत की एकता और अखंडता सबसे महत्वपूर्ण है और इसे हर कीमत पर सुरक्षित रखा जाना चाहिए। इसे हासिल करने के लिए, सभी वर्गों के लोगों को एकजुट करके एक व्यापक प्रतिरोध बनाना बेहद जरूरी है।

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